Poetry of Pratibha Chauhan
पत्तो की डायरी
Tuesday, July 17, 2012
कुछ लम्हे
अरसा गुज़र गया
इक लम्हे की तरह
काश !
ये सफर कभी खत्म न होता।
मेरे आँसू की हर एक बूँद
समुन्दर बन गई
भले तुमने नहीं समझा
उसकी गहराई को।
---- पत्तो की डायरी से
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
गजल संग्रह- “तुम भी नहीं’’ - श्री अनिरुद्ध सिन्हा
गजल संग्रह- “तुम भी नहीं’’ ( गज़लकार - श्री अनिरुद्ध सिन्हा) पृष्ठ -104...
दोषसिद्ध
आज खुलीं आँखें गर्वीलीं आज खुलीं आँखें गर्वीलीं काली पट्टी की देवी के हाथों में देखो समय ने मधु मदिरा पीली आज खुलीं------ सोच रहा मानस...
माँ
तुम बिन लोक जगत मर्माहत सूने अंचल और इन्द्रधनुष प्रेम , त्याग , क्षमा , दया की धारा धैर्य , कुशलता , धर्म परायण जीवन रहा तुम्...
गजल संग्रह- “तुम भी नहीं’’ - श्री अनिरुद्ध सिन्हा
गजल संग्रह- “तुम भी नहीं’’ ( गज़लकार - श्री अनिरुद्ध सिन्हा) पृष्ठ -104...
No comments:
Post a Comment